ज़रा नजाकत से थामना होंठ खुले और आंख बदं हो भी सकती है। ज़रा नजाकत से थामना होंठ खुले और आंख बदं हो भी सकती है।
मत टूटने दे तेरे विश्वास को, मत बुझने दे उम्मीद की आस को, मत टूटने दे तेरे विश्वास को, मत बुझने दे उम्मीद की आस को,
लम्हों को शरारतों से सजाकर स्मृति की संदूक में भर ले कल झंझावतों से लड़ना है। लम्हों को शरारतों से सजाकर स्मृति की संदूक में भर ले कल झंझावतों से ...
राष्ट्रभाषा हिन्दी पर कविता राष्ट्रभाषा हिन्दी पर कविता
मैं रहती हूँ जिस देश में , है उसका नाम भारत , मैं रहती हूँ जिस देश में , है उसका नाम भारत ,
कामयाबी की कृतियाँ बहुत हैै, यह कुछ पक्तिंयाँ नाकामयाबी के नाम। कामयाबी की कृतियाँ बहुत हैै, यह कुछ पक्तिंयाँ नाकामयाबी के नाम।